अव्यय (Avyay)परिभाषा भेद पहचान और उदाहरण,Avyay in hindi

 



अव्यय (Avyay)-परिभाषा भेद पहचान और उदाहरण ,Avyay in Hindi .

अव्यय ऐसे शब्द होते हैं जो वाक्य में जैसे के तैसे ही प्रयोग होते हैं ।इन पर लिंग वचन क्रिया संज्ञा सर्वनाम कारक विशेषण इत्यादि का प्रयोग नहीं पड़ता ।

जैसे : जब ,तब, कौन, कहां ,किसका, इधर,उधर ऊपर, नीचे ,केवल, यहां, वहां, लेकिन ,किंतु ,परंतु  इत्यादि ।

अव्यय किसे कहते हैं 

जिन शब्दों के रूप में लिंग ,वचन ,कारक, इत्यादि के कारण कोई परिवर्तन नहीं होता ,उन्हें अव्यय या अविकारी शब्द कहते हैं ।

हिंदी व्याकरण में विकार के आधार पर शब्दों को दो भागों में बांटा गया है।" विकारी और अविकारी" विकारी शब्द में संज्ञा सर्वनाम, क्रिया , विशेषण इत्यादि आते हैं। जबकि अविकारी शब्द में क्रिया- विशेषण, संबंधबोधक ,समुच्चयबोधक, विस्मयादिबोधक और निपात आते हैं ।

अव्यय का शाब्दिक अर्थ है = अ - व्यय अर्थात "जो व्यय ना हो "ऐसे शब्दों को अव्यय कहते हैं ।

जैसे = उधर ,जब ,तब ,किंतु ,वहां ,आदि  शब्द अविकारी शब्द  या अव्यय कहलाते हैं ।

अव्यय की परिभाषा : 

किसी भी भाषा के वे शब्द अव्यय कहलाते हैं, जिसमें लिंग, वचन ,पुरुष, काल, कारक इत्यादि के कारण कोई भी परिवर्तन उत्पन्न नहीं होता ।ऐसे शब्द हर परिस्थिति में अपने मूल रूप में बने रहते हैं ।अवयव का रूपांतरण नहीं होता इसलिए ऐसे शब्द अविकारी कहलाते हैं ।

अव्यय के उदाहरण : 

हिंदी में अव्यय शब्द है : जब, तब ,अभी ,इधर,उधर,  तब, कब, क्यों ,वाह!, आह!, ठीक, अरे ,और, तथा ,एवं ,किंतु, परंतु ,बल्कि ,इसलिए ,अतः ,क्योंकि ,आवश्यक, अर्थात, इत्यादि ।

अव्यय शब्द के वाक्य में प्रयोग के उदाहरण :

 • अभी वह इधर आ रहा है ।

 • किसी अच्छे होटल में खाना सही रहेगा ।

 • अभी इधर ही थोड़ा वक्त बिता लेते हैं ।

 • सुरेश  अपना काम कर रहा है ।

 • अरे ! वहां  कौन आ रहा है ?

 • मजदूर बहुत थक गया है ।

 • रविता प्रतिदिन पड़ती है ।

 • हम अब बाजार जा रहे हैं ।

 • वह अभी इधर क्यों आया ?

 •   किताब कहां रखी है ?

अव्यय के भेद : 

हिंदी व्याकरण के अनुसार अव्यय के पांच भेद होते हैं 

  • क्रिया विशेषण 

  • संबंध बोधक 

  • समुच्चयबोधक 

  • विस्मयादिबोधक 

  • निपात

१. क्रिया विशेषण अव्यय :

क्रिया विशेषण अव्यय “किसी भी क्रिया  शब्द की विशेषता बतलाने वाले शब्द क्रिया विशेषण कहलाते हैं। उदाहरण 1. मीरा मधुर गाती है।
2. कोयल अपने मधुर स्वर से सभी का मन मोह लेती है।
3. राम बहुत थक गया है।
4. हवा धीरे-धीरे बह रही है।
5. मोहन ने धीरे से कहा।

क्रिया विशेषण के भेद

क्रिया विशेषण के निम्न पांच भेद होते हैं

  1. कालवाचक क्रिया विशेषण
  2. स्थान वाचक क्रिया विशेषण
  3. परिमाणवाचक क्रिया विशेषण
  4. रीतिवाचक क्रिया विशेषण
  5. स्थितिवाचक क्रिया विशेषण

कालवाचक क्रिया विशेषण

इसमें कार्य होने के समय का ज्ञान होता है। जैसे – आज, कल, अभी, पीछे, अब, जब, तब, कभी-कभी, कब, अब से, नित्य, जबसे, हमेशा से, सदा से, अभी-अभी, तभी, आजकल और कभी।

उदाहरण 

(i) राधा अभी आई है।

(ii) तुम अब जा सकते हो।

(iii) वह परसों आएगा।

(iv) वह सदैव देर से आता है।

(v) कभी-कभी राम शाम को भी घर नहीं आता है।

स्थान वाचक क्रिया विशेषण

क्रिया होने से स्थान या दिशा का ज्ञान होता है। जैसे – यहाँ, वहाँ, कहाँ, जहाँ, आस-पास, दूर-दूर। 

उदाहरण

-(i) बालक यहाँ नहीं है।

(ii) वहाँ कोई नहीं है

(iii) राम कहाँ जायेगा

(iv) जहाँ रामू है, वहाँ श्याम भी 

परिमाणावाचक क्रिया विशेषण

जिन विशेषणों से क्रिया की मात्रा या उसके परिमाण का बोध होता है, उसे परिमाणवाचक क्रिया कहते हैं। उदाहरण  

(i) वह बिल्कुल थक गया है।

(ii) उतना खाओ, जितना पचा सको।

(iii) वह खूब पानी पीता है।

(iv) वह थोड़ा पैसा मांग रहा है।

दिशा वाचक क्रिया विशेषण

इसमें दिशा का ज्ञान होता है। जैसे- इधर, उधर, जिधर, दूर, परे, अलग, दाहिने, बाँये, आर-पार।

रीतिवाचक क्रिया विशेषण

जिन अविकारी शब्दों से क्रिया होने की रीति का ज्ञान हो, उन्हें रीतिवाचक क्रिया विशेषण कहते हैं। उदाहरण (i) वह आपकी बात ध्यान से सुन रहा है।
(ii) अध्यापक ने रानी को भलीभांति समझा दिया है।
(iii) नि:संदेह श्याम एक ईमानदार बालक है।
(iv) वह दावत में जरूर जायेगा।

रीतिवाचक क्रिया विशेषण के भेद

विधिबोधक– सहसा, हाथों-हाथ, विधिपूर्वक, परिश्रमपूर्वक, धीरे-धीरे, शीघ्र आदि।

निश्चयबोधक– हाँ, अवश्य, जरूर, वास्तव में, बेशक, सचमुच आदि।

अनिश्चयवाचक– शायद, प्रायः, बहुधा, अक्सर, कदाचित।

हेतु बोधक– क्यों, किसलिए, इसलिए, अतः, क्योंकि।

निषेधवाचक– न, नहीं, मत, कभी नहीं, कदाचित्, नहीं।

प्रश्नवाचक– क्यों, कैसे, क्या।

स्वीकृति बोधक– हाँ, हाँजी, ठीक, सच।

अवधारण बोधक– हाँ, भी, मात्र, तो, भर तक आदि।

आकस्मिता बोधक– सहसा, एकाएक, अचानक।

आवृति बोधक– सरासर, फटाफट, धड़ाधड़, खटाखट, झटपट, चुपचाप।


 २. संबंध बोधक अव्यय : 

संबंधवाचक वह शब्द है जो प्रायः किसी संज्ञा या सर्वनाम  के पहले आकर उस संज्ञा या सर्वनाम का संबंध वाक्य के अन्य शब्दों से कराता है। ये संज्ञा या सर्वनाम के बाद प्रयुक्त होते हैं। इसके साथ किसी न किसी परसर्ग का भी प्रयोग होता हैं।

जैसे :- के पास, के ऊपर, से दूर, के कारण, के लिए, की ओर, की जगह, के अनुसार, के आगे, के साथ, के सामने आदि।

उदाहरण :-

  • किताबें टेबल पर है।
  • उसके बिना मेरा काम नहीं चलता।
  • राम की तुलना में श्याम एक अच्छा आदमी है।
  • यहां परबिनातुलना संबंधवाचक अव्यय हैं। 

नोट :- संबंधवाचक का प्रयोग किसी संज्ञा या सर्वनाम के पहले किया जाता है।

सम्बन्ध बोधक अव्यय के प्रकार

  • प्रयोग के आधार पर
  • व्युतप्ति के आधार पर
  • काल के आधार पर

प्रयोग के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के प्रकार

प्रयोग के आधार पर सम्बन्ध बोधक अव्यय के मुख्य रूप से दो प्रकार हैं।

  1. संबद्ध सम्बन्धबोधक अव्यय
  2. अनुबद्ध सम्बन्धबोधक अव्यय

1. संबद्ध सम्बन्धबोधक अव्यय

संबद्ध संबंध वाचक विभक्ति अथवा कारक के बाद उपयोग किया जाता है।

जैसे :-

  • ऊपर की ओर
  • जाने के बाद
  • राम की तरह
  • ज्ञान के बिना मुक्ति नहीं है।
  • विधालय के सामने / बाहर / कुछ लोग खड़े थे।
  • हमें घर से बाहर निकलने से पहले माता पिता को प्रणाम करना चाहिए।
  • रवि मित्रों के साथ विदेश घूमने गया है।
  • उसे पत्र द्वारा सूचित करो।

2. अनुबद्ध सम्बन्धबोधक अव्यय

अनुबद्ध संबंध वाचक संज्ञा के बाद उपयोग किया जाता है।

जैसे :-

  • वहां तक
  • घर तक
  • गृह रहित
  • हमें सफलता मिलने तक प्रयास करना चाहिए।
  • रवि मित्रों सहित शिमला घूमने गया है।

व्युत्पत्ति के आधार पर संबंधबोधक अव्यय के प्रकार

व्युत्पत्ति के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय दो प्रकार के होते हैं।

  1. मूल संबंधबोधक अव्यय
  2. यौगिक संबंधबोधक अव्यय

1. मूल संबंधबोधक अव्यय

वे संबंधबोधक अव्यय जिनमें किसी अन्य शब्द का योग नहीं होता है उन्हें मूल संबंधबोधक अव्यय कहते हैं. हिंदी में मूल संबंधबोधक अव्यय बहुत कम हैं।

जैसे :-बिना, पर्यंत, नाईं, पूर्वक इत्यादि।

2. यौगिक संबंधबोधक अव्यय

वे संबंधबोधक अव्यय जिनका निर्माण दो शब्दों को मिलाकर होता है उन्हें यौगिक संबंधबोधक अव्यय कहते हैं।

जैसे :-

मारफत, नाम, समान, सरीखा, भीतर, बाहर, पास, परे, मारे, जान, करके।

अर्थ के आधार पर सम्बन्धबोधक अव्यय के प्रकार

अर्थ के आधार पर संबंधवाचक के बारह प्रकार हैं।

  1. कालवाचक संबंधबोधक
  2. स्थानवाचक संबंधबोधक
  3. दिशावाचक संबंधबोधक
  4. साधनवाचक संबंधबोधक
  5. विरोधसूचक संबंधबोधक
  6. समतासूचक संबंधबोधक
  7. हेतुवाचक संबंधबोधक
  8. सहचरसूचक संबंधबोधक
  9. विषयवाचक संबंधबोधक
  10. संग्रवाचक संबंधबोधक
  11. कारणवाचक संबंधबोधक
  12. सीमावाचक संबंधबोधक

1. कालवाचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से समय का बोध हो, उसे कालवाचक संबंधबोधक कहते हैं। उदहारण के लिए पहले, आगे, पश्चात, बाद, पीछे, उपरांत इत्यादि कालवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • सतयुग के बाद त्रेतायुग आता है।
  • वह बारिश छूटने के पश्चात घर गया।

2. स्थानवाचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से स्थान का बोध हो, उसे स्थानवाचक संबंधबोधक कहते हैं। उदाहरण के लिए बाहर, ऊपर, आगे, बीच, पीछे, भीतर, नीचे, सामने, निकट इत्यादि स्थानवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • मेरे स्कूल के सामने पार्क है।
  • मैं उसके पीछे खड़ा था।

3. दिशावाचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से दिशा का बोध हो, उसे दिशा वाचक संबंधबोधक कहते है। निकट, पास, तरफ, ओर, सामने, प्रति इत्यादि दिशावाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • सत्य के प्रति ईमानदार होना चाहिए।
  • आसमान की तरफ देखकर नही चलना चाहिए।

. साधनवाचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से किसी साधन का बोध हो, उसे साधनवाचक संबंधबोधक कहते हैं। द्वारा, सहारे, मार्फत, निमित्त, जरिये, माध्यम इत्यादि साधनवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • अर्जुन को कृष्ण के द्वारा गीता का ज्ञान प्राप्त हुआ।
  • वह कुर्सी के सहारे पेड़ पर चढ़ गया।

. विरोधसूचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से प्रतिकूलता या विरोध का बोध हो, उसे विरोधसूचक संबंधबोधक कहते हैं। विपरीत, विरूद्ध, उल्टे, प्रतिकूल इत्यादि विरोधसूचक संबंधबोधक है।

जैसे :- 

  • सैनिक आतंकवाद के विरोध में लड़ाई करते हैं।
  • पेंगुइन गर्मी के प्रतिकूल होते हैं।

6. समतासूचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से समानता का बोध हो, उसे समतासूचक संबंधबोधक कहते हैं। सदृश, जैसा, सामान्य, वैसा, तुल्य, अनुसार, तरह समतावाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • नायलोन सिल्क के सदृश होता है।
  • वह वैसा है जैसा उसे होना चाहिए।

7. हेतुवाचक संबंधबोधक

अथवा, अतिरिक्त, रहित, सिवा इत्यादि हेतुवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • वह नेत्र रहित है।
  • तुम इसके सिवा कुछ नहीं कर सकते।

8. सहचरसूचक संबंधबोधक

वाक्यों में ऐसे शब्द जहां समेत, संग, साथ आदि शब्द पाए जाते हैं, वहाँ पर सहचर-सूचक संबंध बोधक अवयव होते हैं ।

जैसे :-

  • वह अपने मित्रों के साथ घूमने चला गया।
  • वह अपने मामा के संग गया।

9. विषयवाचक संबंधबोधक

लेख, विषय इत्यादि विषयवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • मुझे लेख लिखना अच्छा लगता है।
  • मेरा पसंदीदा विषय गणित हैं।

10. संग्रवाचक संबंधबोधक

भर, समेत, तक इत्यादि संग्रवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • वह घर तक आकर चला गया।
  • रानी समेत खुशी भी दोषी है।

11. कारणवाचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से किसी कारण का बोध हो, उसे कारणवाचक संबंधबोधक कहते हैं। हेतु, खातिर, वास्ते, कारण, निमित्त इत्यादि कारणवाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • रावण का पतन उसके अहंकार के कारण हो गया।
  • तुम्हे जीतने के खातिर दौड़ना होगा।

12. सीमावाचक संबंधबोधक

जिन संबंधवाचक अव्यय से सीमा का बोध हो, उसे सीमावाचक संबंधबोधक कहते हैं। मात्र, पर्याप्त, तक, भर इत्यादि सीमावाचक संबंधबोधक है।

जैसे :-

  • अभी हमारे पास शुद्ध जल पर्याप्त मात्रा में नहीं है।
  • भारत जम्मू कश्मीर से कन्याकुमारी तक फैला हुआ है।

 ३. समुच्चयबोधक अव्यय :

समुच्चय बोधक अव्यय वह शब्द है जो दो शब्दों, वाक्यांशों अथवा वाक्यों को जोड़ता है। वाक्यों को जोड़ने के कारण इसे संयोजक अव्यय  भी कहते हैं।

उदाहरण :-

  • राजन और इकबाल लंबे हैं।
  • मुझे एक कलम या पेंसिल दो।
  • मैं उस पर विश्वास करता हूं क्योंकि वह ईमानदार है।

ऊपर दिए गए वाक्यों में ‘और’, ‘या’, ‘क्योंकि’ संयोजक अव्यय हैं। प्रथम वाक्य में और दो शब्दों को जोड़ता है। दूसरे वाक्यों में या दो वाक्यांशों को जोड़ता है, जबकि तीसरे वाक्य में क्योंकि दो वाक्यों को जोड़ता है।

समुच्चय बोधक के प्रकार

समुच्चयबोधक के मुख्यतः दो प्रकार होते हैं।

  1. समानाधिकरण समुच्चय बोधक
  2. व्यधिकरण समुच्चय बोधक

समानाधिकरण समुच्चय बोधक 

समानाधिकरण समुच्चयबोधक सामान वाक्य, वाक्यांशों को जोड़ने का काम करते हैं।

जैसे :- तथा, तो, और इत्यादि।

  • राम और लक्ष्मण भाई थे।
  • तुम तो बहुत समझदार हो।
  • आलू तथा गोभी सब्जी हैं।

समानाधिकरण समुच्चयबोधक के प्रकार

समानाधिकरण समुच्चयबोधक के मुख्यतः छः प्रकार होते है 

  1. संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  2. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  3. विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  4. विरोधदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  5. परिमाणदर्शक समानाधिकरण समुच्चयबोधक
  6. वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

. संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

संयोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक दो या दो से अधिक वाक्यों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं।

जैसे :- व, तथा, और, भी, एवं इत्यादि।

  • मै और तुम साथ विद्यालय जायेंगे।
  • कमल तथा सुनील कमजोर विद्यार्थी हैं।
  • बड़े एवं छोटे सभी का सम्मान करना चाहिए।

2. विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

विभाजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक दुसरे शब्दों, वाक्यों या वाक्यांशों में विभाजन प्रकट करते हैं अर्थात यह दो वाक्यों या शब्दों को अलग करते हैं।

जैसे :- अन्यथा, चाहे, नही तो, क्या क्या, परंतु, तो, वा, या, मगर, चाहे, या-या, ताकि, चाहे-चाहे, न-न, न कि, चाहे, अथवा, वा इत्यादि।

  • अभी से सो जाओ ताकि अगली सुबह जल्दी उठ सको।
  • उसने बहुत कहा मगर उसकी बात किसी ने नहीं सुनी।
  • मैं यह काम करूंगा चाहे तुम कुछ भी कर लो।

. विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

विकल्पसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय से हमें विकल्पो का बोध होता है।

जैसे :- या, अन्यथा, अथवा, कि इत्यादि।

  • तुम या तो खेलो या पढ़ाई करो।
  • थोड़ा जल्दी करो अन्यथा देर हो जायेगी।
  • वह कर से जायेगा अथवा बस से।

4. विरोधसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

विरोधसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक दो विरोधी वाक्य या उपवाक्यों को जोड़ने का काम करते हैं।

जैसे :- वरना, लेकिन, मगर, किंतु, पर, परन्तु, बल्कि इत्यादि।

  • सोहन ने बहुत पढ़ाई की परन्तु प्रथम नही आ सका।
  • अच्छा हो या बुरा पर मुझे यह काम करना है।
  • तुम जाओ वरना मैं चला जाऊंगा।

परिणामसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

परिणामसूचक समानाधिकरण समुच्चयबोधक दो उपवाक्यों को जोड़ते हैं और जोड़ने के बाद उन दोनों वाक्य के परिणाम का बोध कराते हैं। 

जैसे :- अतः, फलताः, इस कारण, अतएव, परिणाम स्वरूप, इसलिए, अन्यथा, फलस्वरूप इत्यादि।

  • उसने सबसे नेक काम किया परिणामस्वरूप उसे अच्छी पहचान मिली।
  • इस फल में बहुत अधिक कीड़े होते हैं इसलिए यह खाने के लिए सही नहीं हैं।
  • मैं छोटा हूँ, अतः मैं वहां नहीं पहुंच सकता हूँ।

6. वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक

वियोजक समानाधिकरण समुच्चयबोधक अव्यय से जुड़ने या त्याग करने का बोध होता है। 

जैसे :- या, न, अथवा इत्यादि।

  • सोहन अथवा राम में से ही कोई जीतेगा।
  •  तो मैने और  ही तुमने वहां जाने की हिम्मत दिखाई

व्यधिकरण समुच्चयबोधक 

व्यधिकरण समुच्चयबोधक किसी वाक्य के आश्रित उपवाक्यों को जोड़ने का काम करते हैं।

जैसे :- यधपी, इसलिए, तथापि इत्यादि।

व्यधिकरण समुच्चय बोधक के प्रकार

व्यधिकरण समुच्चयबोधक चार प्रकार के होते है।

  1. कारणसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक
  2. संकेतसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक
  3. उद्देश्यसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक
  4. स्वरुपसूचक व्याधिकरण समुच्चयबोधक

1. कारणसूचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक

कारणसूचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक से दो जुड़े हुए वाक्यों में हो रहे क्रिया के कारण का पता चलता है।

जैसे :- क्योंकि, इस लिए, ताकि, चुकी, इस कारण, जोकि, इसलिए कि, कि इत्यादि।

  • तुम अभी खेलने नहीं जा सकते क्योंकि तुम अभी बीमारी हो।
  • वह बहुत सुंदर है इसलिए मुझे पसंद है।
  • तुम बैठ जाओ ताकि मैं पढ़ा सकूं।

2. संकेतसूचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक

संकेतसूचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक दो वाक्यों में से पूरे वाक्य की घटना का परीणाम का बोध कराता है।

जैसे :- यदि, परंतु, यदपी, जा, तो, तथापि इत्यादि।

  • ज़िन्दगी में सफल होना हैं तो मेहनत करना पड़ता है।
  • अगर मैं वहा नही पहुंचा तो मैं हार जाऊँगा।

. उद्देश्यवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक

उद्देश्यवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक दो वाक्यों को जोड़कर उनके उद्देश्य का बोध कराते हैं। 

जैसे :- ताकि, जिससे, इसलिए की, कि, जो इत्यादि।

  • तुम खड़े हो जाओ ताकि वह बैठ सके।
  • तुम्हे कसरत करनी चाहिए जिससे तुम स्वस्थ रहो।
  • मैंने यह सब इसलिए किया कि वह सुधर जाए।

4. स्वरूपवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक

स्वरूपवाचक व्यधिकरण समुच्चयबोधक से मुख्य वाक्य के अर्थ का बोध होता है। 

जैसे :- यानी, जैसे, अर्थात, कि, मानो इत्यादि।

  • तुम्हारा चेहरा ऐसा खिला है जैसे कि कोई गुलाब हो।
  • सात दिन यानी एक सप्ताह होता है।

 ४. विस्मयादिबोधक :

विस्मयादिबोधक अव्यय ऐसे वाक्य को कहते हैं, जिन वाक्यों में आश्चर्य, हर्ष, शोक, घृणा करना आदि के भाव आते हो, तो उन वाक्यों को विस्मयादिबोधक वाक्य कहते हैं।

इन वाक्यों में सामान्यतः विस्मयादिबोधक चिन्ह (!) का प्रयोग किया जाता है।

विस्मयादिबोधक के उदाहरण : 

  • अरे वहां! चले जाओ नहीं तो मार खाओगे।
  • हाय! यह क्या हुआ।
  • हाय! अब तुम यहां से कैसे जाओगे।
  • अरे! राधा कब आ गई।
  • वाह! रमेश ने तो कमाल ही कर दिया
विस्मयादिबोधक के भेद :

 १ . :शोक बोधक

शोक बोधक ऐसे शब्द है, जिनमें हाय!, बाप रे!, बाप रे बाप!, हे राम!, ओह!, उफ़!, त्राहि–त्राहि!, आह!, हा! आदि जैसे शब्द आते हैं, उन शब्दों को शोक बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • हे राम! मोहन के साथ यह क्या हो गया।
  • बाप रे बाप! तुमको किसने पीटा।
  • उफ़! तेरी अदा।
 २.तिरस्कार बोधक :

तिरस्कार बोधक ऐसे शब्द होते हैं, जिसमें तिरस्कार का भाव हो, जैसे छि:!, थू-थू, धिक्कार!, हट!, धिक्!, धत!, चुप! आदि के भाव आते हो, उन शब्दों को तिरस्कार बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • दोस्त के नाम पर धिक्कार है! तुम तो मेरा एक भी मदद नहीं किए।
  • हट! यहां से।
  • चुप! करो तुम लोग बहुत बोलती है।
  • चुप! हो जाओ और मैं अपना बेज्जती नहीं सह सकता।
३. स्वीकृति बोधक:

 स्वीकृति बोधक ऐसे शब्द होते हैं, जिसमें स्वीकार का बोध हो। जैसे अच्छा!, ठीक!, हाँ!, जी हाँ!, बहुत अच्छा!, जी! आदि जैसे शब्द आते हैं, उन्हें स्वीकार बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • जी हां! मैं हूं खलनायक।
  • अच्छा! तुम ही हो क्या जो पीके देख रहे थे।
  • अच्छा! तो हम चलते हैं।
४.विस्मयादि बोधक:

 विस्मयादिबोधक ऐसे शब्द होते हैं, जिनमें विस्मय में का भाव आता है। जैसे अरे!, क्या!, ओह!, सच!, हैं!, ऐ!, ओहो!, वाह! आदि जैसे शब्द आते हैं, इन शब्दों को विस्मयादिबोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • सच! कह रहा है दीवाना, दिल-दिल न किसी से लगाना।
  • ओहो! तुम ही थे क्या, कल जिसने मेरे घर पर आकर डोर-बेल बजा कर भाग गए थे।
  • वाह! क्या बात कर रहे हैं, तुम तो सफल हो गए
५. संबोधन बोधक:

 संबोधन बोधक ऐसे शब्द होते हैं, जिनमें संबोधन का शब्द आता हो भाव आता हो जैसे हो!, अजी!, ओ!, रे!, री!, अरे!, अरी!, हैलो!, ऐ! आदि जैसे शब्दों को संबोधन बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • हेलो! कौन बोल रहे हो।
  • अजी! सुनते हो देखो कौन आया है।

हर्षवर्धन बोधक: 

हर्ष बोधक शब्द ऐसे शब्द होते हैं, जिसमें हर्ष उल्लास का भाव आता हो जैसे वाह-वाह!, धन्य!, अति सुन्दर!, अहा!, शाबाश!, ओह! आदि जैसे शब्द आते हैं।

उदाहरण

  • शाबाश! बेटा तुम ने कर दिखाया।
  • अति सुंदर! तुमने तो बहुत अच्छा चित्र बनाया।
  • वाह! तुम्हारा मैच तो बहुत ही कमाल का था।

भय बोधक: 

ऐसे शब्द होते हैं, जिन्हें भय का भाव होता है। जैसे बाप रे बाप!, ओह!, हाय!, उई माँ!, त्राहि–त्राहि! आदि जैसे शब्द को हम भय बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • कोरोना के बजे से त्राहि-त्राहि! मच गई है।
  • बाप रे बाप! तुमको इतना किसने मारा
 

आशीर्वाद बोधक:

आशीर्वाद बोधक ऐसे शब्द को कहते हैं, जिस शब्द में आशीर्वाद देने का भाव आता हो जैसे  दीर्घायु हो!, जीते रहो! आदि जैसे सर को हम आशीर्वाद बोधक कहते हैं।

उदाहरण

  • जीते रहो! पुत्र तुम्हें संसार की सारी खुशियां मिले।
  • दीर्घायु हो! पुत्र तुम दूधो नहाओ पूतो फलो।

अनुमोदन बोधक:

 अनुमोदन बोधक एक ऐसे शब्द होते हैं, जिसमें अनुरोध का भाव आता हो। जैसे हाँ, हाँ!, बहुत अच्छा!, अवश्य! आदि जैसे शब्द को हम अनुमोदन बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • अवश्य! भगवान हमेशा तुम्हारे साथ रहेंगे।
  • हां हां! सच बोलने से भगवान हमेशा साथ देते हैं।
  • हां हां! आप सही बोल रहे हो।
विदास बोधक :

विदास बोधक ऐसे शब्द होते हैं, जिनमें विदा भाव आता हो। जैसे अच्छा!, अच्छा जी!, टा-टा! आदि जैसे शब्द को हम विदास बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • अच्छा! तो हम चलते हैं।
  • टा-टा! फिर आएंगे हम मिलने।

विवशता बोधक: 

विवशता बोधक शब्द होते हैं, जिनमें विवशता का भाव आता हैं। जैसे काश!, कदाचित्!, हे भगवान! आदि जैसे शब्द का प्रयोग हो, ऐसे शब्द को विवशता बोधक शब्द कहते हैं।

उदाहरण

  • काश। कोई लड़का मुझे प्यार करता।
  • कदाचित। तुम सही बोल रही हो लेकिन किसी भी बात को मानने के लिए सबूत की जरूरत होती है।
  • हे भगवान। मेरी किस्मत को क्या हो गया।

५. निपात

 जब किसी भी बात पर अधिक बल दिया जाता है या उस बात पर अतिरिक्त जोर देने के लिए जिन शब्दों का प्रयोग किया जाता है, उसे निपात कहते है। यह ऐसे शब्द है जिनका खुद का कोई अर्थ नहीं होता है।

उदाहरण : कल मैं भी आपके साथ चलूँगा।

इस वाक्य में मैं शब्द पर बल देने के लिए भी शब्द का प्रयोग किया गया है, जोकि निपात शब्द है।

निपात नौ  प्रकार के होते हैं :

1) स्वीकारात्मक निपात

इन वाक्यों में किसी बात को स्वीकारने का अर्थ प्रकट होता है।ऐसे वाक्यों में पूछे गए प्रश्न का उत्तर स्वीकार्य रूप अर्थात हां में ही होता है। ऐसे वाक्यों में हाँ, जी, जी हाँ आदि शब्दों का प्रयोग उत्तर के रूप में होता है।

 उदाहरण 

प्रश्न- आप बाजार जा रहे हैं

 उत्तर- जी हाँ।

2) नकारात्मक निपात  

ऐसे वाक्यों में प्रश्न का जवाब नहीं के रूप में होता है। इसके लिए नहीं, जी नहीं आदि शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

उदाहरण:  प्रश्न: तुम्हारे पास यह कलम है ?

              उत्तर- नहीं।

(3) निषेधात्मक निपात

इस प्रकार के वाक्यों में किसी को किसी कार्य के लिए मना या किसी को इनकार करने का बोध होता है।

उदाहरण : आज आप मत जाइए।

            मुझे अपना मुँह मत दिखाना।

(4) प्रश्नात्मक निपात

 इस प्रकार के वाक्यों में प्रश्न पूछा जाता है।

उदाहरण:   क्या तुम अंग्रेजी पढ़ना जानते है

(5) तुलनात्मक

इन वाक्यों में किसी की तुलना की जाती है। यह तुलना किसी से भी की जा सकती है।

उदाहरण:इस लड़के सा पढ़ना कठिन है।

(6) आदरबोधक 

 जी
उदाहरण – जी में ही कर दूंगा।

(7) विस्मयादिबोधक 

 काश
उदाहरण – काश! मैं उससे मिल पाता।

(8) सीमावाचक 

 तक,भर,केवल,मात्र आदि
उदाहरण – मैं उसकी ओर देखता तक नहीं।
                  मैंने उसे देखा भर था।
                  केवल तू आ जा ।
                  मात्र दस दिन रहा था।

(9) बलार्थ ही,भी 
उदाहरण – उसे मरना ही था।
                  मुझे भी पता है।

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