visheshan in Hindi

         * विशेषण की परिभाषा 

         * उदाहरण 

         * विशेषण और विशेष्य में भेद 

         * उद्देश्य   विशेषण और विधेय विशेषण 

         * प्रविशेषण 

         * विशेषण के भेद व उदाहरण 

 

परिभाषा :  

*विशेषण वो शब्द हैं जो किसी भी संज्ञा या सर्वनाम को विशेष प्रदान करते हैं। (विशेषण ऐसे शब्द हैं जो संज्ञा या सर्वनाम को विशिष्टता प्रदान करते हैं।)

*ये ऐसे शब्द हैं जो संज्ञाओं को संशोधित या वर्णित करते हैं, वाक्यों को अधिक जानकारीपूर्ण और अभिव्यंजक बनाने के लिए विवरण जोड़ते हैं।

उदाहरण :

काला घोड़ा, चार केले, लंबी मेज ।

विशेषण और विशेष्य 

* जिस संज्ञा या सर्वनाम शब्द की विशेषता प्रकट की जाए वह विशेष्य कहा जाता है ।

*जो विशेषता सूचक शब्द होते हैं वह विशेषण कहलाते हैं ।

 जैसे : मुझे मीठे व्यंजन अच्छे लगते हैं ।

        : मीठे =  विशेषण 

        :व्यंजन =विशेष्य 

उद्देश्य/ विशेष्य -विशेषण और विधेय विशेषण :

"विशेष्य से पूर्व आने वाले विशेषण ,विशेष्य विशेषण या उद्देश्य विशेषण कहलाते हैं; तथा विशेष्य के बाद आने वाले विशेष्य की विधेय विशेषण कहलाते हैं "।

जैसे :  १. "चतुर "बालक अपना काम कर लेते हैं =                             (विशेष्य विशेषण )

२.वह बालक बहुत "चालाक" है =(विधेय विशेषण )

प्रविशेषण : 

*जो विशेषण विशेषण की भी विशेषता बताते हैं ।

जैसे

 १. मोहन "बहुत सुंदर "लड़का है ।

 २. राम" बहुत अच्छा "गाता है ।

 ३. राधा "बहुत अच्छा "लिखती है ।

(इन वाक्यों में बहुत सुंदर ,बहुत अच्छा इत्यादि शब्द प्रविशेषण  है ;क्योंकि वह लड़के के सुंदर होने का गाने का और लिखाई के सुंदर होने को दर्शाते हैं ।

            " अर्थात "

यह शब्द विशेषण की भी विशेषता को दर्शा रहे हैं। )

विशेषण के भेद 

   १.गुणवाचक विशेषण 

   २.संख्यावाचक विशेषण 

   ३.परिमाणवाचक विशेषण 

   ४.सार्वनामिक विशेषण 



१. गुणवाचक विशेषण :

  .  विशेषण का अर्थ होता है  :" गुण "

  .  यहां गुण का तात्पर्य है किसी भी वस्तु या व्यक्ति         की विशेष स्थिति, दशा ,दिशा, रंग ,रूप ,आकार,       स्वाद, बुराई, इत्यादि से है  ।

  .  अतः जो विशेषण शब्द  संज्ञा- सर्वनाम की                 उपयुक्त विशेषता का बोध कराते है, वे                      " गुणवाचक  विशेषण" कहलाते हैं ।

   जैसे :

  गुण, दोष ,रंग, आकार ,स्वाद ,स्पर्श, काल, दिशा,      दशा ,अवस्था ,स्थान इत्यादि ।

  उदाहरण :

  १. खाना बहुत स्वाद है ।

  २.वह बहुत अच्छा  गाती है ।

  ३. यह कंबल बहुत कोमल है ।

 ( इन वाक्यों में हमें खाने के स्वाद होने का अच्छा         गाने का और कंबल की कोमलता का अर्थात स्पर्श     करने के गुण का बोध होता है। )


 २. संख्यावाचक विशेषण :

जो सब संज्ञा या सर्वनाम की संख्या संबंधित विशेषताओं को दर्शाते हैं, उन्हें संख्या वाचक विशेषण कहा जाता है ।ड

इसके  दो भेद हैं :

 १. निश्चित  संख्या वाचक  

 २. अनिश्चित संख्या वाचक 

निश्चित संख्यावाचकऐसे विशेषण जो हमें            किसी भी वस्तु, व्यक्ति (संज्ञा) एं सर्वनाम का            निश्चित बोध  कराएं, वे निश्चित संख्यावाचक              विशेषण कहलाते हैं।

    जैसे: चार वृक्ष, तीन कलम, एक, दो, तीन, आठ                  गाय, एक   दर्जन पेंसिल, पाँच बालक, दस                  आम आदि।

 १.अंक बोधक : .अपूर्ण संख्या बोधक

                       .पूर्ण संख्या बोधक

  = इसमें अंक या किसी गिनती का बोध होता है 

   • जैसे : 1/2,1/4, पाव ,आधा, सवा (अपूर्ण संख्या                 बोधक )

            : 1,2,3,4,5( पूर्ण संख्या बोधक )

 २. क्रम बोधक : जिन विशेषणों से किसी निश्चित                                    क्रम का बोध हो  

  • जैसे : पहले ,चौथाा ,सातवां,  12वां 

 ३. आवृत्ति बोधक : जिस विशेषण से संज्ञा सर्वनाम                की तहों का या गुणो का बोध हो

  • जैसे : दुगुना,  चौगुनाा,इकहरा 

 ४. समुदाय बोधक : जिस विशेषण से कुछ संख्याओं के समूह का बोध होता है ।

  • जैसे : दोनों , तीनों , सब के सब, तीनों के तीनों 

 ५. समुच्चय बोधक : संज्ञा या सर्वनाम के किसी         प्रचलित समूचे को प्रकट करने वाले विशेषण को समुच्चयबोधक विशेषण कहा जाता है ।

  • जैसे : दर्जन, युगम, जोड़ा ,सैकड़ा  

  ६ . प्रत्येक बोधक : जिस विशेषण से प्रत्येक          विभाग  का बोध हो 

   • जैसे  : प्रत्येक, हर मांस, हर वर्ष ,एक -एक ,                       

 अनिश्चय संख्या वाचक :     

ऐसे विशेषण जो हमें किसी संज्ञा या सर्वनाम का निश्चित बोध नहीं करा पाते एवं उनमें अनिश्चितता बनी रहती है, ऐसे विशेषण शब्द अनिश्चित संख्यावाचक विशेषण कहलाते हैं।

जैसे: कुछ, अनेक, बहुत, सारे, सब, कुछ, कई, थोडा, सैंकड़ों , अनेक, चंद, अनगिनत, हजारों आदि।



३ .परिमाणवाचक विशेषण :

जिन विशेषण शब्दों से किसी वस्तु के परिमाण, मात्रा, माप या तोल का पता चले, वे परिमाणवाचक विशेषण कहलाते हैं

 इसके दो भेद है :

१.निश्चित परिमाणवाचक 

२.अनिश्चित परिमाणवाचक 

 निश्चित परिवारवाचक : "जो विशेषण संज्ञा या सर्वनाम के निश्चित परिमाण का बोध कराते हैं उन्हें निश्चित परिमाण वाचक कहते हैं "।

  जैसे : 5 किलो, एक तोला ,10 मीटर

  उदाहरण : १. एक दर्जन केले लाना ।

                 २. वे तीन पेंसिल मेरी है ।

                 ३.उसने  एक सेब खाया ।

 अनिश्चित परिमाण वाचक : जो विशेषण संज्ञा सर्वनाम के निश्चित नहीं अभी तो अनिश्चित परिमाण का बोध कराते हैं उन्हें अनिश्चित परिमाण वाचक शब्द कहा जाता है " ।

  जैसे : ढेर सारा ,कई किलो, थोड़ा सा 

 उदाहरण : १. ढेर सारे फल पड़े हैं ।

                २. थोड़ा सा दूध लेते आना ।

                ३.कई किलोमीटर दूर उसका गांव है। 






 ४. सार्वनामिक विशेषण : 

वे सर्वनाम शब्द संज्ञा के पहले आकर विशेषण का काम करते हैं, उन्हे सार्वनामिक विशेषण कहते हैं।

सार्वनामिक विशेषण के भेद : 

  १. निश्चयवाचक या संकेत वाचक 
  २.अनिश्चयवाचक 
  ३. प्रश्नवाचक 
  ४.संबंधवाचक 
  
 निश्चयवाचक या संकेत वाचक : यह संज्ञा या              सर्वनाम के निश्चित होने  का संकेत देते हैं ।
  
    जैसे : १. 'यह 'किताब मेरी है ।

             २. "इसको" नहीं "उस" पुस्तक को पढ़ो ।

  • अनिश्चित वाचन  सर्वनामिक विशेषण  :  यह        यह शब्द संज्ञा सर्वनाम  की अनिश्चित की ओर संकेत करते हैं । 
 
   जैसे : १ ." कोई" आदमी तुमसे मिलने आया है ।

           २. "किसी" भिखारी को "कुछ "खिला दो ।
  
  • प्रश्नवाचक सर्वनामिक  विशेषण : यह संज्ञा या              सर्वनाम से   संबंधित प्रश्नों का बोध कराते हैं  ।

   जैसे : १ . "कौन" लड़का खड़ा है ?
      
            २. "किसको "यह पुस्तक दूं ?

 संबंध वाचक सार्वनामिक विशेषण  :  यह            विशेषण संज्ञा या सर्वनाम का   संबंध वाक्य में प्रयुक्त अन्य संज्ञा या  सर्वनाम शब्दों से जोड़ते हैं। 

   जैसे :  १. "जो "लड़का कल आएगा" उसे" अभी                      पहचान लो ।
      
            २. "जिस" काम को ना करना हो " उस"                        पर विचार मूर्खता है ।
   

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