वाच्य (Voice) ,वाच्य परिभाषा भेद एवं उदाहरण
वाच्य परिभाषा भेद एवं उदाहरण वाच्य परिवर्तन :
वाच्य क्रिया के उसे परिवर्तन को कहते हैं; जिसके द्वारा इस बात का पता चलता है; कि वाच्य में कर्ता, कर्म या भाव इनमें से किसकी प्रधानता है। इसमें यह स्पष्ट होता है, कि वाक्य में इस्तेमाल लिंग ,वचन या पुरुष कर्ता, कर्म या भाव में से किसके अनुसार है। आईए वाच्य के बारे में और विस्तार से जाने ।
वाच्य का शाब्दिक अर्थ है = "बोलने का विषय "
वाच्य की परिभाषा :
क्रिया के जिस रूप से यह जाना जाए की क्रिया द्वारा किए गए विधान या कहीं गई बात का विषय, कर्म या भाव है उसे वाच्य (Vachya )कहा जाता है ।
दूसरे शब्दों में वाक्य में क्रिया का प्रमुख मुख्य संबंध कर्ता, कर्म या भाव से है वह वाचय (Vachya )कहलाता है ।
जैसे :
• मां ने खाना बनाया ।
• मां के द्वारा खाना बनाया गया ।
यद्यपि दोनों वाक्य का अर्थ सामान्य तो लग रहा है ,किंतु दोनों के अर्थ में परिवर्तन है ।दोनों वाक्य की संरचना भी अलग है। इसमें कर्ता द्वारा मां के कार्य खाना बनाने को प्रधानता दी गई है ।
वाक्य १ : कर्ता क्रिया को करने में सक्रिय रूप से भाग लेता है दूसरे वाक्य में इसकी क्रिया की भूमिका निष्क्रिय हो जाती है ।
वाक्य २: कर्ता के कार्य को निकालने का प्रयत्न किया गया है ।
वाच्य के तीन भेद है
• कृत वाच्य
• कर्म वाच्य
• भाव वाच्य
१ • कृत वाच्य :
जैसे :
लड़की बाजार जा रही है ।
कविता गाना गाएगा ।
मां रामायण पढ़ रही है ।
वह व्यायाम कर रहा है ।
राम रोटी खाता है ।
२ • कर्म वाच्य :
जिन वाक्यों में कम मुख्य हो तथा इसकी सकर्मक क्रिया के लिंग, वचन वह पुरुष कर्म के अनुसार हो ,उसे कर्मवाच्य कहा जाता है ।
दूसरे शब्दों में जहां वाच्य बिंदु कर्ता न हो कर कर्म हो उसे कर्मवाच्य कहा जाता है ।
जैसे :
• रोटी राम से खाई जाती है ।
• कविता से गाना गया जाता है ।
• उस से व्यायाम किया जाता है।
• वर्षा से पुस्तक पढ़ी गई ।
• लड़कियों द्वारा बाजार जाया जा रहा है ।
कर्मवाच्य के प्रयोग स्थल :
* जहां करता अज्ञात हो : जैसे: पत्र भेजा गया ।
* जब बिना चाहे कोई कर्म अचानक आ गया हो :जैसे : कांच का गिलास टूट गया ।
* जहां करता को प्रकट न करना हो :जैसे : डाकुओं का पता लगाया जा रहा है ।
* सूचना ,विज्ञप्ति आदि में जहां कर्ता निश्चित नहीं है : जैसे :अपराधियों को कल पेश किया जाएगा ।
* आशक्यता सूचित करने के लिए : जैसे :अब अधिक दूध नहीं पिया जाता ।
३• भाव वाच्य :
जिस वाक्य में अकर्मक क्रिया का भाव मुख्य हो, उसे भाव वाच्य कहा जाता है ।
दूसरे शब्दों में जहां वाच्य बिंदु ना तो करता हो ,और ना ही कम हो बल्कि क्रिया का भाव ही मुख्य हो, उसे भाव वाच्य कहा जाता है ।
जैसे :
• हमसे वहां नहीं ठहर जाता ।
• मुझसे बैठा नहीं जाता ।
• अब चला जाए ।
• मुझसे शोर में सोया नहीं जाता ।
• उससे आगे क्यों नहीं पढ़ा जाता ।
भाव वाच्य का प्रयोग स्थल
१ भाववाचक का प्रयोग सदैव असमर्थता या विवशता प्रकट करने के लिए नहीं के साथ किया जाता है ।
जैसे
अब चल नहीं जाता
अब तो पहचान भी नहीं जाता
२ जहां नहीं का प्रयोग नहीं होता वहां मूल कर्ता सामान्य होता है ।
जैसे
अब चला जाए
चलो ऊपर सोया जाए
( कुछ विद्वान वाक्य के दो भेद कृतवाच्य और आकृतवाच्य मानते हैं । तथा भाववाच्य और कर्मवाच्य को आकृतवाच्य का ही भेद मानते हैं ।)
कृत वाच्य का भाववाचक में परिवर्तन
कर्तृवाच्य:
लड़किया बाज़ार जा रही है।
मैं रामायण पढ़ रहा हूँ।
ममता ने रामायण पढ़ी।
लता गाना गाएगी।
धर्मवीर वेद पढ़ेगा।
लड़कियों द्वारा बाजार जाया जा रहा है।
मेरे द्वारा रामायण पढ़ी जा रही है।
ममता से रामायण पढ़ी गई।
लता से गाना गाया जाएगा।
धर्मवीर से वेद पढ़ा जाएगा।
कर्तृवाच्य:
राम तेज दौड़ता है।
मैं सर्दियों में नहीं नहाता।
आशा नहीं हँसती।
बच्चा खूब सोया।
रमा नहीं पढ़ती।
भाववाच्य:
राम से तेज दौड़ा जाता है।
मुझसे सर्दियों में नहीं नहाया जाता।
आशा से नहीं हँसा जाता।
बच्चे से खूब सोया गया।
रमा से पढ़ा नहीं जाता।
कर्मवाच्य से कर्तृवाच्य
कर्मवाच्य
बच्चे से कहानी सुनाई जाएगी।
मां द्वारा मिठाई बनाई जाती है।
रोहन से मूर्ति बनाई जाती है।
निकिता द्वारा भोजन बनाया गया।
गरीबों में जूते बांटे गए।
कर्तृवाच्य
बच्चा कहानी सुनाएगा।
मां मिठाई बनाती है।
रोहन मूर्ति बनाता है।
निकिता ने भोजन बनाया।
गरीबों में जूते बाटें।
भाववाच्य से कर्तृवाच्य
भाववाच्य
बच्चे से खूब खिलखिलाया गया।
हमसे रहा नहीं गया।
हनी से हंसा जाता है।
उससे रोया भी नहीं जा सका।
सरिता से घर में सोया जाता है।
कर्तृवाच्य
बच्चा खूब खिलखिलाया।
हम रह नहीं पाए।
हनी हंसता है।
वह रो भी नहीं सकी।
सरिता घर में सोती है।
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